तेरे आगे रोयें अब इतने भी बेगैरत नहीं हैं हम। कभी मुहँ में उसका नाम तो कभी सिगरेट का साथ, मैं बस खुद को अपना मानता हूं, क्योंकि दुनिया �
तेरे आगे रोयें अब इतने भी बेगैरत नहीं हैं हम। कभी मुहँ में उसका नाम तो कभी सिगरेट का साथ, मैं बस खुद को अपना मानता हूं, क्योंकि दुनिया �